श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  1.29.20-21 
त्रीन् पदानथ भिक्षित्वा प्रतिगृह्य च मेदिनीम्।
आक्रम्य लोकाँल्लोकार्थी सर्वलोकहिते रत:॥ २०॥
महेन्द्राय पुन: प्रादान्नियम्य बलिमोजसा।
त्रैलोक्यं स महातेजाश्चक्रे शक्रवशं पुन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भगवान विष्णु बलि के बल से त्रिलोकी का राज्य छीनना चाहते थे; अतः उन्होंने तीन पग आगे बढ़कर उनसे भूमि का दान स्वीकार किया और तीनों लोकों पर आक्रमण करके उन्हें देवराज इन्द्र को लौटा दिया। महातेजस्वी श्रीहरि ने अपनी शक्ति से बलि को वश में करके त्रिलोकी को पुनः इन्द्र के अधीन कर दिया। 20-21॥
 
'Lord Vishnu, who is always ready for the welfare of the entire world, wanted to take the kingdom of Triloki by the power of Bali; Therefore, he took three steps and accepted the donation of land from them and after attacking all the three worlds, he returned them back to Devraj Indra. Mahatejasvi Shri Hari, by controlling Balika with his power, again brought Triloki under the control of Indra. 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)