Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.29.13: "प्रभु! मैं इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को आपके शरीर में स्थित देखता हूँ। आप सनातन हैं। चूँकि आप देश, काल और द्रव्य की सीमाओं से परे हैं, अतः आपका इस प्रकार वर्णन नहीं किया जा सकता। मैं आपकी शरण में आया हूँ।"॥13॥   |   ramayan सर्ग 1.29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.29.13 
शरीरे तव पश्यामि जगत् सर्वमिदं प्रभो।
त्वमनादिरनिर्देश्यस्त्वामहं शरणं गत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"प्रभु! मैं इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को आपके शरीर में स्थित देखता हूँ। आप सनातन हैं। चूँकि आप देश, काल और द्रव्य की सीमाओं से परे हैं, अतः आपका इस प्रकार वर्णन नहीं किया जा सकता। मैं आपकी शरण में आया हूँ।"॥13॥
 
"Prabhu! I see this entire universe situated in your body. You are eternal. Since you are beyond the limits of space, time and matter, you cannot be described in this way. I have come to your refuge."॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)