Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.29.12: "प्रभो! आप तप से परिपूर्ण हैं। आप तप के स्वरूप हैं। तप आपका स्वभाव है। आप ज्ञान के स्वरूप हैं। मैंने बहुत अच्छी तरह तप किया है और उसके प्रभाव से मैं आपको, परम पुरुष को देख रहा हूँ॥ 12॥ | ramayan सर्ग 1.29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"प्रभो! आप तप से परिपूर्ण हैं। आप तप के स्वरूप हैं। तप आपका स्वभाव है। आप ज्ञान के स्वरूप हैं। मैंने बहुत अच्छी तरह तप किया है और उसके प्रभाव से मैं आपको, परम पुरुष को देख रहा हूँ॥ 12॥
"Lord! You are full of penance. You are the embodiment of penance. Penance is your nature. You are the embodiment of knowledge. I have performed penance very well and due to its effect, I am seeing you, the Supreme Being.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥