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गम्यतामिति तानाह यथेष्टं रघुनन्दन:।
मानसा: कार्यकालेषु साहाय्यं मे करिष्यथ॥ १४॥
अनुवाद
तब रघुकुलनन्दन राम ने उनसे कहा - 'अभी तो तुम सब अपने अभीष्ट स्थान को जाओ; परन्तु आवश्यकता पड़ने पर मेरे स्मरण में बने रहना और सदैव मेरी सहायता करना।'॥14॥
Then Raghukul Nandan Ram said to them - 'For now you all may go to your desired destination; but in the time of need remain in my mind and always help me.'॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥