श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 27: विश्वामित्र द्वारा श्रीराम को दिव्यास्त्र  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.27.4-5 
तानि दिव्यानि भद्रं ते ददाम्यस्त्राणि सर्वश:।
दण्डचक्रं महद् दिव्यं तव दास्यामि राघव॥ ४॥
धमर्चक्रं ततो वीर कालचक्रं तथैव च।
विष्णुचक्रं तथात्युग्रमैन्द्रं चक्रं तथैव च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! तुम्हारा कल्याण हो। आज मैं तुम्हें वे सभी दिव्यास्त्र प्रदान कर रहा हूँ। वीर! मैं तुम्हें दिव्य एवं महान् दण्डचक्र, धर्मचक्र, कालचक्र, विष्णुचक्र और अत्यंत भयंकर इन्द्रचक्र प्रदान करूँगा।॥ 4-5॥
 
‘Raghunandan! May you be blessed. Today I am giving you all those divine weapons. Brave! I will give you the divine and great Dandachakra, Dharmachakra, Kalachakra, Vishnuchakra and the extremely fearsome Indrachakra.॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)