| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध » श्लोक 5 |
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| | | | श्लोक 1.26.5  | गोब्राह्मणहितार्थाय देशस्य च हिताय च।
तव चैवाप्रमेयस्य वचनं कर्तुमुद्यत:॥ ५॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘गौ, ब्राह्मण और सम्पूर्ण देश के हित के लिए मैं आप जैसे अद्वितीय एवं प्रभावशाली संत की आज्ञा का हर प्रकार से पालन करने के लिए तैयार हूँ।’ ॥5॥ | | | | 'For the benefit of cows, brahmins and the whole country, I am ready to follow the orders of a unique and influential saint like you in every way.' ॥ 5॥ | | ✨ ai-generated | | |
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