श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.26.36 
निहत्य तां यक्षसुतां स राम:
प्रशस्यमान: सुरसिद्धसंघै:।
उवास तस्मिन् मुनिना सहैव
प्रभातवेलां प्रतिबोध्यमान:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
यक्षकन्या ताड़का का वध करके श्री रामचन्द्रजी देवताओं और सिद्धों की प्रशंसा के पात्र हो गए। वे विश्वामित्रजी के साथ ताड़का वन में प्रातःकाल की प्रतीक्षा करते रहे।
 
After killing the Yakshakanya Tataka, Shri Ramchandraji became worthy of praise from the gods and the Siddha group. He stayed in the Tataka forest with Vishwamitraji waiting for the morning.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे षड‍‍्विंश: सर्ग:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें छब्बीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २६॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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