श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.26.35 
मुक्तशापं वनं तच्च तस्मिन्नेव तदाहनि।
रमणीयं विबभ्राज यथा चैत्ररथं वनम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उसी दिन वह वन शाप से मुक्त हो गया और चैत्ररथ वन की भाँति सुन्दर होकर अपनी मनोहर शोभा दिखाने लगा।
 
On that very day the forest became free from the curse and became beautiful and began to display its charming splendor like the Chaitrarath forest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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