श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  1.26.34-35h 
विश्वामित्रवच: श्रुत्वा हृष्टो दशरथात्मज:॥ ३४॥
उवास रजनीं तत्र ताटकाया वने सुखम्।
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र की यह बात सुनकर दशरथपुत्र श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए और ताड़का वन में ही रहकर उस रात्रि को बड़े आनंद से व्यतीत किया।
 
Hearing this from Vishwamitra, Dasaratha's son Shri Ram became very happy. He stayed in Tataka forest and spent that night very happily.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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