| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध » श्लोक 32-33h |
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| | | | श्लोक 1.26.32-33h  | ततो मुनिवर: प्रीतस्ताटकावधतोषित:॥ ३२॥
मूर्ध्नि राममुपाघ्राय इदं वचनमब्रवीत्। | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात् ताड़का के वध से संतुष्ट होकर ऋषि विश्वामित्र ने भगवान् राम का सिर सूंघकर उनसे यह कहा -॥32 1/2॥ | | | | Thereafter, sage Visvamitra, satisfied with the killing of Tataka, smelt the head of Lord Rama and said this to him -॥ 32 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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