श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  1.26.28-29h 
मुने कौशिक भद्रं ते सेन्द्रा: सर्वे मरुद्‍गणा:॥ २८॥
तोषिता: कर्मणानेन स्नेहं दर्शय राघवे।
 
 
अनुवाद
'मुनि! कुशिकानंदन! आपका कल्याण हो। इस कार्य से आपने इंद्र सहित समस्त देवताओं को संतुष्ट किया है। अब आप रघुकुल के वंशज श्री राम के प्रति अपना स्नेह प्रकट करें।॥ 28 1/2॥
 
‘Muni! Kushikanandan! May you be blessed. By this act you have satisfied all the gods including Indra. Now express your affection towards Shri Ram, the descendant of Raghukul.॥ 28 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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