| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 1.26.14  | विश्वामित्रस्तु ब्रह्मर्षिर्हुंकारेणाभिभर्त्स्य ताम्।
स्वस्ति राघवयोरस्तु जयं चैवाभ्यभाषत॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | यह देखकर ऋषि विश्वामित्र ने गर्जना करके उन्हें डाँटा और कहा - 'रघुवंश के ये दोनों राजकुमार सफल हों। इनकी विजय हो।'॥14॥ | | | | Seeing this, the sage Viswamitra rebuked him with his roar and said, 'May these two princes of the Raghu clan prosper. May they be victorious.'॥ 14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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