श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.26.12 
न ह्येनामुत्सहे हन्तुं स्त्रीस्वभावेन रक्षिताम्।
वीर्यं चास्या गतिं चैव हन्यामिति हि मे मति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह स्त्रीस्वभावसे सुरक्षित है; अतः उसे मारनेमें मुझे कोई रुचि नहीं है। मेरा तो अभीष्ट है कि मैं उसका बल और गतिशक्ति नष्ट कर दूँ (अर्थात् उसके हाथ-पैर काट दूँ)॥12॥
 
‘She is protected due to her feminine nature; therefore I have no enthusiasm in killing her. My intention is to destroy her strength and power of movement (i.e. cut off her hands and legs)’॥ 12॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas