श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.26.10 
पश्य लक्ष्मण यक्षिण्या भैरवं दारुणं वपु:।
भिद्येरन् दर्शनादस्या भीरूणां हृदयानि च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! देखो, इस यक्षिणी का शरीर कितना भयंकर और भयंकर है! इसके दर्शन मात्र से भयभीत मनुष्यों के हृदय विदीर्ण हो जाते हैं। 10॥
 
'Laxman! Look, how fierce and fierce the body of this Yakshini is! The mere sight of it can shatter the hearts of fearful men. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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