श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.25.8 
तां तु बालां विवर्धन्तीं रूपयौवनशालिनीम्।
जम्भपुत्राय सुन्दाय ददौ भार्यां यशस्विनीम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
धीरे-धीरे वह यक्ष कन्या बड़ी होकर सुन्दर और युवा हो गई। उस आयु में सुकेतु ने अपनी यशस्वी कन्या को जम्भ के पुत्र सुन्द को पत्नी रूप में दे दिया।
 
‘Gradually that Yaksha girl started growing up and became beautiful and youthful. At that age Suketu gave his famous daughter to Jambha's son Sunda as his wife.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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