श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.25.6 
पितामहस्तु सुप्रीतस्तस्य यक्षपतेस्तदा।
कन्यारत्नं ददौ राम ताटकां नाम नामत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! यक्षराज सुकेत की तपस्या से भगवान ब्रह्मा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने सुकेतुक को एक कौमार्य मणि प्रदान की, जिसका नाम ताड़का था ॥6॥
 
'Sriram! Lord Brahma was very happy with the penance done by Yaksharaj Suket. He gave Suketuka a virgin gem, whose name was Tataka. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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