श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.25.5 
पूर्वमासीन्महायक्ष: सुकेतुर्नाम वीर्यवान्।
अनपत्य: शुभाचार: स च तेपे महत्तप:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल की कथा है, सुकेतु नाम का एक महान यक्ष था। वह बहुत शक्तिशाली और गुणी था; किन्तु उसकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने घोर तपस्या की।
 
‘It is a story of ancient times, there was a great Yaksha named Suketu. He was very powerful and virtuous; but he had no children; therefore he performed great penance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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