श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.25.3-4 
इत्युक्तं वचनं श्रुत्वा राघवस्यामितौजस:।
हर्षयन् श्लक्ष्णया वाचा सलक्ष्मणमरिंदमम्॥ ३॥
विश्वामित्रोऽब्रवीद् वाक्यं शृणु येन बलोत्कटा।
वरदानकृतं वीर्यं धारयत्यबला बलम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अनंत यशस्वी श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर विश्वामित्रजी ने अपनी मधुर वाणी से शत्रुओं का नाश करने वाले श्री रामजी और लक्ष्मणजी को प्रसन्न करके कहा, 'रघुनंदन! मैं तुमसे कहता हूँ कि ताड़का किस कारण अधिक शक्तिशाली हो गई है, सुनो। वरदान के कारण उसमें शक्ति उत्पन्न हो गई है; अतः वह दुर्बल होने पर भी बल धारण करती है (बलवान हो गई है)॥3-4॥
 
On hearing these words of the infinitely illustrious Shri Raghunath, Vishwamitra, with his sweet voice, made Shri Ram, the destroyer of enemies and Lakshmana happy and said, 'Raghunandan! I will tell you the reason why Tataka has become more powerful, listen. Power has arisen in her due to the boon; hence, even though she is weak, she bears power (has become strong).॥ 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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