श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.25.2 
अल्पवीर्या यदा यक्षी श्रूयते मुनिपुंगव।
कथं नागसहस्रस्य धारयत्यबला बलम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे महर्षि! जब उस यक्षिणी को अबला स्त्री माना गया है, तो उसका बल तो बहुत ही अल्प होगा; फिर उसमें हजार हाथियों का बल कैसे हो सकता है?॥2॥
 
‘O great sage! When that Yakshini is considered a helpless woman, then her strength must be very less; then how does she possess the strength of a thousand elephants?’॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd