श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.25.19 
राज्यभारनियुक्तानामेष धर्म: सनातन:।
अधर्म्यां जहि काकुत्स्थ धर्मो ह्यस्यां न विद्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
राज्यपालन करने वालों का यही सनातन धर्म है। ककुत्स्थकुल के पुत्र! ताटक महापापी है। उसमें धर्म का लेशमात्र भी नहीं है; अतः उसे मार डालो॥19॥
 
‘This is the eternal religion of those who are responsible for the maintenance of the kingdom. Son of Kakutsthakul! Tataka is a great sinner. There is not even a trace of religion in him; therefore kill him.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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