श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.25.18 
नृशंसमनृशंसं वा प्रजारक्षणकारणात्।
पातकं वा सदोषं वा कर्तव्यं रक्षता सदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘राजा को अपनी प्रजा की रक्षा के लिए जो भी कार्य करना चाहिए, चाहे वह क्रूर हो या क्रूर, पाप हो या दोषयुक्त। उसे सदैव इस बात का ध्यान रखना चाहिए ॥18॥
 
‘For the protection of his subjects, a king should do any act, whether cruel or non-cruel, sinful or faulty. He should always keep this in mind.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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