श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  1.24.7-8h 
राघवस्य वच: श्रुत्वा कौतूहलसमन्वितम्॥ ७॥
कथयामास धर्मात्मा तस्य शब्दस्य निश्चयम्।
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के वचन इस रहस्य को जानने की उत्सुकता से भरे हुए थे। यह सुनकर धर्मात्मा विश्वामित्र ने उस महान् वचन (तुमुलध्वनि) का निश्चित कारण बताया और कहा- ॥7 1/2॥
 
Shri Ramchandraji's words were filled with eagerness to know this mystery. Hearing this, the virtuous Vishwamitra told the definite reason for that great word (Tumuldhvani) and said – ॥ 7 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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