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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय
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श्लोक 3
श्लोक
1.24.3
आरोहतु भवान् नावं राजपुत्रपुरस्कृत:।
अरिंष्ट गच्छ पन्थानं मा भूत् कालस्य पर्यय:॥ ३॥
अनुवाद
'महर्षि! आप इन राजकुमारों को आगे ले जाकर इस नाव पर बैठाइए और मार्ग को सुचारू रूप से प्रशस्त कीजिए, जिससे विलम्ब न हो॥3॥
'Maharshe! You take these princes ahead and sit on this boat and pave the way smoothly, so that there is no delay. 3॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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