श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  1.24.29-30 
सेयं पन्थानमावृत्य वसत्यत्यर्धयोजने॥ २९॥
अत एव च गन्तव्यं ताटकाया वनं यत:।
स्वबाहुबलमाश्रित्य जहीमां दुष्टचारिणीम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'वह यक्षिणी इस वन में डेढ़ योजन (छह कोस) का मार्ग घेरे हुए रहती है; अतः हमें ताड़का वन की ओर चलना चाहिए। तुम अपने बल से इस दुष्टा स्त्री का वध करो।'
 
'That Yakshini lives in this forest, enclosing the path of one and a half yojana (six kos); therefore, we should go in the direction of the Tataka forest. You should kill this wicked woman by using your strength.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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