श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  1.24.28-29h 
राक्षसो भैरवाकारो नित्यं त्रासयते प्रजा:।
इमौ जनपदौ नित्यं विनाशयति राघव॥ २८॥
मलदांश्च करूषांश्च ताटका दुष्टचारिणी।
 
 
अनुवाद
हे रघुनन्दन! वह भयानक राक्षस यहाँ के लोगों को सदैव आतंकित करता रहता है। वह दुष्ट ताटक भी मलाड और करुष नामक दो जनपदों का सदैव नाश करता रहता है।॥28 1/2॥
 
‘That terrifying demon always terrorises the people here. O son of Raghunandan! That wicked Tataka also always destroys the two districts of Malad and Karush.॥ 28 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd