श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  1.24.25-26h 
कस्यचित्त्वथ कालस्य यक्षिणी कामरूपिणी॥ २५॥
बलं नागसहस्रस्य धारयन्ती तदा ह्यभूत्।
 
 
अनुवाद
'कुछ समय पश्चात्, यहाँ एक यक्षिणी आई जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी और उसके शरीर में एक हजार हाथियों का बल था।'
 
‘After some time, a Yakshini who could take any form at will, came here and had the strength of a thousand elephants in her body. 25 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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