श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  1.24.19-20h 
तमिन्द्रं मलिनं देवा ऋषयश्च तपोधना:॥ १९॥
कलशै: स्नापयामासुर्मलं चास्य प्रमोचयन्।
 
 
अनुवाद
'तब देवताओं और तपस्वी ऋषियों ने यहाँ गंगाजल से भरे घड़ों से मलिन इंद्र को स्नान कराया और उसकी अशुद्धता (और भूख) दूर की।
 
'Then the Gods and the ascetic sages bathed the filthy Indra here with pitchers filled with the water of the Ganges and relieved him of his impurity (and hunger).
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd