| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय » श्लोक 15-16h |
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| | | | श्लोक 1.24.15-16h  | सिंहव्याघ्रवराहैश्च वारणैश्चापि शोभितम्।
धवाश्वकर्णककुभैर्बिल्वतिन्दुकपाटलै:॥ १५॥
संकीर्णं बदरीभिश्च किं न्विदं दारुणं वनम्। | | | | | | अनुवाद | | सिंह, व्याघ्र, सूअर और हाथी भी इस वन की शोभा बढ़ा रहे हैं। धौं (धौरा), अश्वकर्ण (एक प्रकार का साल वृक्ष), ककुभ (अर्जुन), बेल, तिन्दुक (तेंदु), पाटल (पादर) और बेर वृक्षों से युक्त यह भयानक वन क्या है?—इसका क्या नाम है?’॥15 1/2॥ | | | | ‘Lions, tigers, boars and elephants are also adding to the beauty of this forest. What is this dreadful forest filled with Dhava (Dhaura), Ashvakarna (a type of Sal tree), Kakubh (Arjuna), Bel, Tinduk (Tendu), Patal (Padar) and Ber trees? — What is its name?’॥15 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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