श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  1.24.12-13h 
स वनं घोरसंकाशं दृष्ट्वा नरवरात्मज:॥ १२॥
अविप्रहतमैक्ष्वाक: पप्रच्छ मुनिपुंगवम्।
 
 
अनुवाद
उस समय इक्ष्वाकु नन्दन राजकुमार श्री राम ने अपने सामने एक भयंकर वन देखा, जिसमें किसी मनुष्य के आने-जाने का कोई चिह्न नहीं था। उसे देखकर उन्होंने ऋषि विश्वामित्र से पूछा-॥12 1/2॥
 
At that time, Ikshwaku Nandan Prince Shri Ram saw a dreadful forest in front of him, in which there was no sign of human coming and going. Seeing that, he asked the sage Vishwamitra -॥ 12 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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