श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  1.24.10-11h 
तस्यायमतुल: शब्दो जाह्नवीमभिवर्तते॥ १०॥
वारिसंक्षोभजो राम प्रणामं नियत: कुरु।
 
 
अनुवाद
इसका जल गंगा में मिल रहा है। दोनों नदियों के जल के टकराव से यह तीव्र ध्वनि उत्पन्न हो रही है, जिसकी कोई तुलना नहीं है। राम! तुम अपने मन को वश में रखो और इस संगम के जल को प्रणाम करो।॥10 1/2॥
 
‘Its water is merging with the Ganga. This loud sound is being produced due to the clash of the waters of the two rivers; which has no comparison. Ram! You should keep your mind in control and bow down to the water of this confluence.'॥ 10 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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