श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.23.15 
तस्यायमाश्रम: पुण्यस्तस्येमे मुनय: पुरा।
शिष्या धर्मपरा वीर तेषां पापं न विद्यते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह उन्हीं महादेवजी का पवित्र आश्रम है। वीर! ये ऋषिगण पूर्वकाल में उन्हीं स्थाणु के पुण्यात्मा शिष्य थे। इनके समस्त पाप नष्ट हो गए हैं॥ 15॥
 
‘This is the holy hermitage of the same Mahadevji. Brave! These sages were the pious disciples of the same Sthānu in the past. All their sins have been destroyed.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)