श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  1.22.22-23h 
विद्यासमुदितो राम: शुशुभे भीमविक्रम:॥ २२॥
सहस्ररश्मिर्भगवान‍्शरदीव दिवाकर:।
 
 
अनुवाद
ज्ञान से परिपूर्ण होकर भयंकर पराक्रमी श्री रामजी हजारों किरणों वाले शरद ऋतु के भगवान सूर्य के समान शोभायमान हो गए॥22 1/2॥
 
Having become full of knowledge, the fearsome and mighty Shri Ram became as beautiful as the Lord Surya of autumn with thousands of rays. 22 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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