श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.21.7 
त्रिषु लोकेषु विख्यातो धर्मात्मा इति राघव:।
स्वधर्मं प्रतिपद्यस्व नाधर्मं वोढुमर्हसि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"रघुकुलभूषण दशरथ बड़े धर्मात्मा पुरुष हैं, यह बात तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। अतः आप अपने धर्म का पालन करें, अधर्म का बोझ अपने सिर पर न लें। 7.
 
"Raghukulbhushan Dasharath is a very righteous man, this fact is famous in all the three worlds. Therefore, you should follow your own dharma; do not take the burden of unrighteousness on your head. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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