श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.21.5 
त्रस्तरूपं तु विज्ञाय जगत् सर्वं महानृषि:।
नृपतिं सुव्रतो धीरो वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसके क्रोध से सारा संसार व्याकुल हो रहा था। उत्तम व्रत का पालन करने वाले धैर्यवान महर्षि वशिष्ठ ने राजा से इस प्रकार कहा-॥5॥
 
The whole world was troubled by his anger. Maharishi Vashishtha, a patient and patient follower of the best fast, said to the king thus - ॥ 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd