श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.21.2 
पूर्वमर्थं प्रतिश्रुत्य प्रतिज्ञां हातुमिच्छसि।
राघवाणामयुक्तोऽयं कुलस्यास्य विपर्यय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पहले तो आपने मुझे मेरी माँगी हुई वस्तु देने का वचन दिया और अब उसे तोड़ना चाहते हैं। यह वचन-त्याग रघुवंशियों को शोभा नहीं देता। यह आचरण इस कुल के नाश का सूचक है॥ 2॥
 
‘O King! First you made a promise to give me the thing I asked for and now you want to break it. This renunciation of a promise is not worthy of the Raghuvanshis. This behaviour is indicative of the destruction of this clan.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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