श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.21.19 
तेनास्य मुनिमुख्यस्य धर्मज्ञस्य महात्मन:।
न किञ्चिदस्त्यविदितं भूतं भव्यं च राघव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! अतः इन महान् धर्मज्ञ महात्मा विश्वामित्र से भूत और भविष्य की कोई बात छिपी नहीं है। 19॥
 
'Ragunandan! Therefore, nothing about the past or the future is hidden from this great religious sage, Mahatma Vishwamitra. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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