श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.21.18 
तानि चास्त्राणि वेत्त्येष यथावत् कुशिकात्मज:।
अपूर्वाणां च जनने शक्तो भूयश्च धर्मवित्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'धर्म में पारंगत यह कुशिकानंदन पुत्र उन समस्त अस्त्र-शस्त्रों को भली-भाँति जानता है। इसमें उन अस्त्रों को बनाने की पूर्ण शक्ति है, जो अब तक उपलब्ध नहीं हुए हैं।॥18॥
 
'This son of Kushikanandan, who is well versed with Dharma, knows all those weapons very well. He has the full power to create those weapons which have not been available till now.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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