श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 21: विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन तथा वसिष्ठ का राजा दशरथ को समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.21.16 
पञ्चाशतं सुताँल्लेभे जया लब्धवरा वरान्।
वधायासुरसैन्यानामप्रमेयानरूपिण:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उनमें से जया ने वरदान प्राप्त करके पचास उत्तम पुत्र उत्पन्न किए हैं, जो अनन्त बलवान और निराकार हैं। वे सब-के-सब दैत्यों की सेनाओं का संहार करने के लिए प्रकट हुए हैं॥16॥
 
‘Among them, Jaya has received boons and has got fifty excellent sons, who are infinitely powerful and formless. All of them have appeared to kill the armies of the demons.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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