श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.20.3 
इयमक्षौहिणी सेना यस्याहं पतिरीश्वर:।
अनया सहितो गत्वा योद्धाहं तैर्निशाचरै:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'यह मेरी अक्षौहिणी सेना है, जिसका मैं रक्षक और स्वामी हूँ। मैं स्वयं इस सेना के साथ जाकर उन रात्रिचर जीवों से युद्ध करूँगा।॥3॥
 
'This is my Akshauhini army, of which I am the protector and master. I myself will go with this army and fight with those night creatures.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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