श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 2: तमसा तट पर क्रौंचवध की घटना से शोक संतप्त वाल्मीकि को ब्रह्मा द्वारा रामचरित्रमय काव्य लेखन का आदेश देना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.2.42 
उदारवृत्तार्थपदैर्मनोरमै-
स्तदास्य रामस्य चकार कीर्तिमान्।
समाक्षरै: श्लोकशतैर्यशस्विनो
यशस्करं काव्यमुदारदर्शन:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा विचारकर उन उदार दृष्टि वाले महर्षि ने भगवान श्री राम के चरित्र पर सहस्रों श्लोकों से युक्त एक महाकाव्य की रचना की, जो उनकी कीर्ति को बढ़ाने वाला है। इसमें श्री राम के उदार चरित्र को प्रस्तुत करने के लिए सुन्दर श्लोकों का प्रयोग किया गया है॥42॥
 
Thinking this, that great sage with a generous vision composed an epic consisting of thousands of verses on the character of Lord Shri Ram, which increases his fame. In this, beautiful verses have been used to present the generous character of Shri Ram. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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