श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म, संस्कार, शीलस्वभाव एवं सद्गुण, राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  1.18.21-22 
अतीत्यैकादशाहं तु नामकर्म तथाकरोत्।
ज्येष्ठं रामं महात्मानं भरतं कैकयीसुतम्॥ २१॥
सौमित्रिं लक्ष्मणमिति शत्रुघ्नमपरं तथा।
वसिष्ठ: परमप्रीतो नामानि कुरुते तदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ग्यारह दिन बीत जाने पर महाराज ने बालकों का नामकरण संस्कार किया। उस समय महर्षि वशिष्ठ ने प्रसन्नतापूर्वक सबके नाम बताए। उन्होंने अपने ज्येष्ठ पुत्र का नाम 'राम' रखा। श्री राम महात्मा (भगवान) थे। कैकेयी कुमार का नाम भरत, सुमित्रा के एक पुत्र का नाम लक्ष्मण और दूसरे का शत्रुघ्न रखा गया। 21-22॥
 
After eleven days had passed, Maharaj performed the naming ceremony of the children. At that time Maharishi Vashishtha happily mentioned everyone's names. He named his eldest son ‘Ram’. Shri Ram was Mahatma (God). Kaikeyi Kumar's name was decided as Bharat, Sumitra's one son was named Lakshman and the other was named Shatrughna. 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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