श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.16.7 
उत्सादयति लोकांस्त्रीन् स्त्रियश्चाप्युपकर्षति।
तस्मात् तस्य वधो दृष्टो मानुषेभ्य: परंतप॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले देव! वे तीनों लोकों को कष्ट देते हैं तथा स्त्रियों का हरण भी करते हैं; अतः उनकी मृत्यु मनुष्य के हाथों ही निश्चित है।
 
'O god who torments his enemies! He torments the three worlds and also abducts women; therefore his death is certain to be at the hands of a human being.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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