श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.16.4 
स हि तेपे तपस्तीव्रं दीर्घकालमरिंदम:।
येन तुष्टोऽभवद् ब्रह्मा लोककृल्लोकपूर्वज:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'उस शत्रुदाम निशाचर ने दीर्घकाल तक घोर तप किया था, जिससे जगत् के रचयिता और समस्त लोगों के पूर्वज ब्रह्माजी उस पर प्रसन्न हो गए थे।॥4॥
 
'That Shatrudam Nishachar had performed intense penance for a long time, due to which Brahmaji, the creator of the world and the ancestor of all people, was pleased with him. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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