श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.16.25 
हर्षरश्मिभिरुद्दॺोतं तस्यान्त:पुरमाबभौ।
शारदस्याभिरामस्य चन्द्रस्येव नभोंऽशुभि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा के अन्तःपुर की स्त्रियाँ बढ़े हुए हर्ष और तेजस्विता से प्रकाशित हो उठीं, जैसे शरद ऋतु के सुन्दर चन्द्रमा की सुन्दर किरणों से आकाश सुशोभित हो रहा हो ॥25॥
 
At that time, the women of the king's harem became illuminated with increased joy and radiant rays, just as the sky is adorned with the beautiful rays of the beautiful autumn moon. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)