श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 16: श्रीहरि से रावणवध के लिये प्रार्थना, पुत्रेष्टि यज्ञ में प्राजापत्य पुरुष का प्रकट हो खीर अर्पण करना और रानियों का गर्भवती होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.16.2 
उपाय: को वधे तस्य राक्षसाधिपते: सुरा:।
यमहं तं समास्थाय निहन्यामृषिकण्टकम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘देवताओं! राक्षसराज रावण को मारने का कौन-सा उपाय है, जिसका आश्रय लेकर मैं उस निशाचर प्राणी को मार सकूँ जो ऋषियों के लिए कंटक था?’॥2॥
 
'Gods! What is the way to kill the demon king Ravana, by resorting to which I can kill that night creature who was a thorn for the sages?'॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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