श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.15.5 
ता: समेत्य यथान्यायं तस्मिन् सदसि देवता:।
अब्रुवँल्लोककर्तारं ब्रह्माणं वचनं तत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस यज्ञ-सभा में एक-एक करके एकत्र होकर (दूसरों से अदृश्य रहते हुए) सभी देवता जगत के रचयिता ब्रह्माजी से इस प्रकार बोले -॥5॥
 
Gathering one by one in that sacrificial assembly (while remaining invisible to others) all the gods spoke to Brahma, the creator of the world, in this manner -॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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