vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 1: बाल काण्ड
»
सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना
»
श्लोक 30-31h
श्लोक
1.15.30-31h
एवं दत्त्वा वरं देवो देवानां विष्णुरात्मवान्॥ ३०॥
मानुष्ये चिन्तयामास जन्मभूमिमथात्मन:।
अनुवाद
देवताओं को ऐसा वरदान देकर मनस्वी भगवान विष्णु ने सबसे पहले मनुष्य लोक में अपने जन्मस्थान का विचार किया । 30 1/2॥
After giving such a boon to the gods, Lord Vishnu, who is a man of mind, first thought about his birthplace in the human world. 30 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd