श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  1.15.23-24h 
ऋषयश्च ततस्तेन गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥ २३॥
क्रीडन्तो नन्दनवने रौद्रेण विनिपातिता:।
 
 
अनुवाद
'उस भयंकर रात्रि ने ऋषियों को तथा नन्दनवन में क्रीड़ा करने वाले गन्धर्वों और अप्सराओं को भी स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरा दिया है।' 23 1/2॥
 
'That fierce night has thrown down the sages and also the Gandharvas and Apsaras who were playing in the Nandanvan from heaven to the earth.' 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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