श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 15: ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  1.15.22-23h 
स हि देवान् सगन्धर्वान् सिद्धांश्च ऋषिसत्तमान्॥ २२॥
राक्षसो रावणो मूर्खो वीर्योद्रेकेण बाधते।
 
 
अनुवाद
'वह मूर्ख राक्षस रावण अपने बढ़े हुए पराक्रम से देवताओं, गन्धर्वों, सिद्धों और महर्षियों को महान् कष्ट दे रहा है। ॥22 1/2॥
 
'That foolish demon Ravana is causing great trouble to the gods, Gandharvas, Siddhas and great sages with his increased prowess. ॥ 22 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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