श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 14: महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का सांगोपांग अनुष्ठान  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  1.14.56-57h 
तस्याशिषोऽथ विविधा ब्राह्मणै: समुदाहृता:॥ ५६॥
उदारस्य नृवीरस्य धरण्यां पतितस्य च।
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों ने भूमि पर लेटे हुए उन उदार योद्धाओं को अनेक आशीर्वाद दिये।
 
The Brahmins bestowed various blessings on those generous warriors lying on the ground. 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)